गर्म चाची को गांव में चोदा

गर्म चाची को गांव में चोदा

Sexstoriesvilla चाची चुदाई कहानी में मैं चाचा के घर रहने गया तो चाचा वहां नहीं थे, चाची अकेली थी. चाची ने मुझे गले लगा लिया. उनकी बड़ी चूचियां मेरी छाती में गड़ गयी.

मेरा नाम राज है, मैं लखनऊ में रहने वाला हूं.
मेरी उम्र 24 साल की है.
मेरा लंड 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है.

मेरे चाचा चाची गांव में रहते हैं.

मैं अपने चाचा के घर गया था.
मेरी चाची का नाम रीमा है और उनकी उम्र 27 साल है.

जब मैं पहुंचा, तो चाची मुझे देख कर खुश होती हुई बोलीं- अरे आ गया राज!
मैंने चाची के पैर छुए.

चाची ने मुझे उठा कर गले से लगा लिया.
चाची के 36 इंच के बूब्स मुझे अपनी छाती में गड़ते हुए महसूस हुए.

उनके मम्मों की सख्ती से मेरा लंड खड़ा होने लगा.
शायद चाची को भी मेरे लंड का उफान महसूस होने लगा था तो चाची पीछे हो गईं.

अब मैंने चाची को सामने से नजर भर कर देखा.
उनके बूब्स 36 इंच के और गांड 38 इंच की रही होगी.

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चाची ने मुझे देखा और बोलीं- कहां खो गए?
मैंने हकलाते हुए कहा- क..कुछ नहीं चाची. वो आपको काफी दिन बाद देख रहा हूँ … तो बस यूं ही!
चाची- बैठ जाओ.

मैं बैठ गया और देखा- चाचा नहीं दिख रहे हैं.
मैंने पूछा- चाचा कहां गए?

चाची बोलीं- वे दिल्ली में हैं और 3 महीने में एक बार आते हैं.
यह बात मुझे मालूम ही नहीं थी.

मैंने कहा- अरे तो आप उनके साथ क्यों नहीं चली जातीं?
वे बोलीं- हां जाऊंगी … पर अभी तेरे चाचा का काम जम जाए तब वे उधर एक अलग घर ले लेंगे, तब मैं उधर चली जाऊंगी.

मैंने ओके कहा और चाची से बात करने लगा.

चाची भी काफी देर तक इधर उधर की बात करती रहीं और उसके बाद वे खाना बनाने चली गईं.

मैं भी बाहर निकल गया और एक पान बीड़ी की दुकान पर जाकर यूं ही समय पास करने लगा.

रात हुई तो मैं वापस घर आया और चाची के साथ खाना खाने की तैयारी करने लगा.

तो रात को खाना आदि खाने के बाद मैं और चाची साथ में सो गए.
चाची के घर पर एक ही बेड था, तो मुझे उनके साथ ही सोना पड़ा था.

रात को एक बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि चाची मेरी तरफ करवट लेकर लेटी हुई थीं और उनकी नाईटी ऊपर उठी हुई थी.

उन्होंने पैंटी नहीं पहनी थी, जिस वजह से उनकी गोरी गांड मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी.
उनकी गोरी गांड देखकर मुझसे रहा नहीं गया, मैंने अपना लंड बाहर निकाला और हिलाने लगा.

कुछ देर बाद मैं उत्तेजित हो गया और न चाहते हुए भी उनकी गांड में लंड रगड़ने लगा.
चाची की गांड की गर्माहट से मेरी सांसें गर्म होने लगीं.

मैं अपना लंड उनकी गांड में रगड़ने लगा.
इससे चाची थोड़ा सा हिलीं.

मैं डर गया कि कहीं चाची जाग तो नहीं गईं.
तो मैं सोने का नाटक करने लगा.

कुछ देर बाद वह पलट गईं और मेरी तरफ मुँह करके लेट गईं.

मैंने जरा सी आंख खोल कर देखा पाया कि वे गहरी नींद में सो रही थीं.
मैं उनके बूब्स दबाने लगा और एक हाथ से मैंने उनकी नाईटी उठा दी.

अब मुझे उनकी गोरी चूत की झलक मिली.
चाची की चूत पर थोड़े थोड़े बाल थे.

मतलब Xxx चाची ने कुछ समय पहले ही झांटों को साफ़ किया होगा.
अब मैं उनकी चूत को अपने अंगूठे से रगड़ने लगा.

रगड़ते रगड़ते मैंने पाया कि चूत ने रस छोड़ दिया था.
उसी वक्त मैंने अपनी एक उंगली को उनकी चूत में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा.

चाची की चूत भभक रही थी.

कुछ देर बाद मैंने अपनी दूसरी उंगली को भी चूत में डाल दिया.
मैं अब दोनों उंगलियों को जल्दी जल्दी अन्दर बाहर करने लगा.

कुछ ही देर में चाची की चूत से पानी निकलने लगा.
मैं समझ गया कि चाची जाग रही हैं और मुझसे खुलने में शर्मा रही हैं.

मैंने उनके कान में कहा- मैं जानता हूं कि आप उठ गई हैं. पूरा मज़ा लेना है तो आंख खोलिए.
इतना कहकर मैं उनके बूब्स दबाने लगा.

एक दो पल बाद चाची ने आंखें खोल दीं और अब वे मुझे देख कर मुस्कुरा रही थीं.
मैं समझ गया था कि Xxx चाची चुदाई के लिए राजी है.
कोई आंटी और भाभी दोस्ती करना चाहती हो तो मुझे मेसेज करे 7707981551
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए और किस करने लगा.
चाची भी साथ देने लगीं.

जल्द ही मैंने उनके मुँह में जीभ डाल दी और हम दोनों जौंक की तरह चिपक कर चूमाचाटी करने लगे.

मैं उनकी चूचियों को भींच रहा था और चुम्मी कर रहा था.
दस मिनट तक हम एक दूसरे को किस करते रहे और मैं उनके दूध मसलता रहा.

फिर चाची ने कहा- मेरे दूध मसलता और मुझे चूमता ही रहेगा या कुछ और भी करेगा?
मैंने कहा- पूरा मजा दूंगा चाची आप बस देखती जाओ.

चाची बोलीं- हां … लंड की सख्ती तो बता रही है कि तू इस खेल का मास्टर हो गया है.
मैंने लंड शब्द सुना तो झट से उठकर चाची की चूत खोल कर उसमें अपना मुँह लगा दिया और जीभ से ही चूत की चटनी बनानी शुरू कर दी.

उनकी चूत पहले से ही गीली थी.
मैं उनकी चूत के अन्दर तक जीभ डाल कर चाट रहा था.
चाची ‘आहह आहह … उई आह …’ कर रही थीं.

वे बोलीं- पहले लंड पेल कर एक बार चोद दो … बाकी मजा अगली बार में ले लेना.
यह सुनते ही मैंने चाची की गांड के नीचे तकिया लगाया और उनके ऊपर चढ़ गया.

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चाची ने भी टांगों को किसी रंडी की तरह से अपने घुटनों से मोड़ा और चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया.
मैंने एक ही झटके में अपने लंड को उनकी भकभकाती हुई चूत में डाल दिया.

मेरा लंड पूरा नहीं घुसा था लेकिन आधे से ज्यादा उनकी चूत में समा गया था.
वे कंप गईं और अभी कुछ कह पातीं कि मैंने उनके मुँह पर अपने होंठ जमाए और वापस एक और झटका दे दिया.

मेरा पूरा लंड उनकी चूत में जड़ तक घुसता चला गया था.

इससे चाची ने पूरी ताकत लगाई और मेरे मुँह से अपना मुँह हटा कर चिल्ला उठीं- हरामखोर आराम से चोद न मादरचोद … क्या एक ही बार में चुद फाड़ देगा भोसड़ी वाले साले … दुबारा नहीं चोदना है क्या … आह कमीने ने तो जान निकाल दी मादरचोद … साले अपनी मां की चूत चोद जाकर मादरचोद … आह लगता है मेरी तो फट ही गई है!’

मैंने देखा कि उनकी आंखों से पानी निकलने लगा था.
मैं थोड़ा आराम से लंड अन्दर बाहर करने लगा.
कोई आंटी और भाभी दोस्ती करना चाहती हो तो मुझे मेसेज करे 7707981551
अब उनको भी मज़ा आने लगा और वे बोलीं- आह अब मजा आ रहा है … अब तेज़ तेज चोद … और तेज़ … फाड़ दो मेरे राजा आह फाड़ दो अपनी चाची की चूत को!

मैंने कहा- हां रंडी साली बहन की लौड़ी … आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा मैं … बहन की लौड़ी छिनाल गाली दे रही थी मुझे कुतिया … आह ले लंड खा मादरचोदी!
चाची हंसने लगीं और बोलीं- अब आया न मर्द का बच्चा मेरे ऊपर … आह चोद मेरे राजा.

इसी तरह से ताबड़तोड़ चुदाई चलने लगी.
कोई 20 मिनट तक चूत चोदने के बाद मैं रूक गया.

तो चाची ने कहा- रूक क्यों गया मादरचोद … अब क्या तेरी मां चुद गई है भोसड़ी के … तेरी मां की गांड में एक साथ दो लंड चले गए हैं क्या?
मैंने कहा- नहीं रे रंडी, अब तेरी गांड में लंड जाने वाला है … भैन की लौड़ी साली … चल जल्दी से घोड़ी बन जा मेरी रंडी … आज तेरी गांड में झंडा गाड़ूँगा. मैं लंड डाल कर तेरी गांड को इतना बजाऊंगा कि तेरी गांड गुफा हो जाएगी हरामन.

तो चाची ने कहा- वहां नहीं, वहां बहुत दर्द होता है.
मैंने कहा- रंडी साली … अब गांड फटने लगी मादरचोद … चल घोड़ी बन और लंड खा!

चाची बेवशी में घोड़ी बन गईं.
मैंने एक ही झटके में लंड डालने की कोशिश की तो चूत गीली होने से लंड फिसल कर उनकी बुर में ही चला गया.

मैंने कहा- अभी गांड नहीं, तो चूत ही सही … साली रंडी तू मुझसे बचकर कहां भाग जाएगी.
मैं चाची की चूत मारने लगा.

पूरे कमरे में फच्च फच्च की आवाजें आ रही थीं.
इसका मतलब था कि चाची झड़ चुकी थीं.

कुछ मिनट बाद चाची पुनः झड़ गईं.

तीन बार झड़ने के बाद चाची ने कहा- अब निकालो इसे … मुझे दर्द हो रहा है.
मगर मैं नहीं माना.

इतने में चाची मूतने लगीं.
उनकी मूतती हुई चूत मुझे और अच्छी लगने लगी.

अब मैं लंड को चाची की गांड में डालने लगा.
गीली गांड में एक बार में ही आसानी से लंड का टोपा अन्दर चला गया.

मैंने उनकी कमर पकड़ी और एक जोरदार धक्का लगा दिया.
मेरा पूरा लंड एक ही झटके में अन्दर तक चला गया.

चाची को दर्द होने लगा.
वे बोलीं- आहह आहह … मार डाला मादरचोद ने … कम से कम बता कर तो डालता. साले ऊपर वाला सब देख रहा है … वह तेरी मां की गांड भी फाड़ देगा … आह आहह आराम आराम से चोद मादरचोद!

मैंने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया.
मुझे समझ आ गया था कि चाची पक्की छिनाल हैं और दोनों तरफ से चुदवा चुकी हैं.

मैं उनकी गांड में लंड को अन्दर बाहर करने लगा.
थोड़ी देर में चाची का दर्द कम होने लगा और वह कामुक आवाजें निकालने लगीं- आहह आहह ओह … चोद दे अपनी चाची की गांड को … आह!

मैं भी मस्ती से चाची की गांड मारने लगा.

कुछ मिनट बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं.
तो मैंने चाची से कहा- मेरा होने वाला है. माल कहां निकालूँ?

चाची ने कहा- बहुत दिन से माल नहीं खाया, आज तेरा माल खा लूँगी. तू आज अपना रस मेरे मुँह में डाल दे.
मैंने अपना लंड चाची के मुँह में डाल दिया.

चाची मेरे लौड़े को चूसने लगीं.
मैंने चाची के बाल पकड़े और मुँह चोदने लगा.
इससे गुंग गुंग की आवाजें आ रही थीं.

दस बारह झटकों के बाद मैं उनके मुँह में झड़ गया.
चाची ने मेरे लौड़े को चूस चूस कर साफ़ कर दिया.

फिर हम दोनों सो गए.

सुबह 10:00 बजे जब मेरी नींद खुली.
तब तक चाची उठ चुकी थीं और मैं नंगा ही लेटा था.

मेरा लंड खड़ा था.

चाची मेरे लिए चाय लाईं और मुझे देख कर मुस्कुराने लगीं.
उन्होंने मेरे खड़े लंड को देख कर मुझे आंख मार दी.
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मेरा लंड खड़ा तो हो ही गया था, चाची की छिनाल नजरों से फिर से लहराने लगा.
मैंने चाची का हाथ पकड़ कर खींच लिया और किस करने लगा.

अब Xxx चाची चुदाई के लिए फिर से गर्म हो गईं.
मैंने चाची को इशारा किया तो वे मेरे लंड पर अपनी चूत सैट करके बैठ गईं.

वे अपनी गांड ऊपर नीचे करने लगीं और मैं उनकी चूचियों की माँ बहन एक करने लगा.

आधा घंटा की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.
चाची की चूत चुदाई के बाद मैं नहाने के लिए बाथरूम में चला गया.

दोस्तो, इस तरह से मैं उनके घर 7 दिन रूका और उनको दिन रात खूब चोदा.
मुझे उनकी गांड मारने में मज़ा आता था. मैंने उनकी गांड भी बहुत मारी.
कोई आंटी और भाभी दोस्ती करना चाहती हो तो मुझे मेसेज करे 7707981551उज्जैन की वो रात

यह मेरी पहली कहानी हैं, इसलिए हो सकता है कि कहीं कोई गलती हो जाए तो एक नादान लन्ड समझ कर माफ़ कर देना।

अपनी ओर से सारी गीली कुंवारी चूतों को अपने लन्ड से प्रणाम करता हूँ, और बन चुके भोसड़ों को दिल से सलाम करता हूँ। जो वे किसी न किसी का भला कर रही हैं।

लोग सेक्स से ना जाने क्यों भागते हैं। ये तो एक शारीरिक आवश्यकता है। इसमें बुराई कैसी?

मेरी यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है व काल्पनिक पात्रों पर लिखी गई है। यह केवल चूतों को गीली करने और लंडों को खड़ा करने के लिए लिखी गई है।

अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ। यह कहानी उस वक्त की है, जब मैं इंदौर रहता था और कभी-कभी किसी काम से उज्जैन जाना पड़ता था। बार-बार के इस अप-डाउन से बेहतर मैंने वहीं रुम लेकर रहना उचित समझा।

मैं एक किराये के रुम से रहने लगा। रोजाना अपने काम पर जाना और वापिस अपने रुम पर लौट आना।

पर होनी को तो शायद कुछ और ही मन्जूर था।

मेरे मकान-मालिक के बारे में आप सबको बताना आवश्यक है।

विनोद वर्मा- मकान मालिक

सुनीता वर्मा- विनोद वर्मा की पत्नी

रानू- सुनीता की बहन की लड़की

प्रेमलता- नौकरानी

विनोद वर्मा का इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का बिजनेस था। इसलिए वो अक्सर बाहर रहा करते थे, सुनीता हाउस वाइफ़ थी और ज्यादातर घर पर ही रहती थी। उसकी आयु लगभग 30 साल रही होगी। कहने को तो वो दिखने में बहुत सामान्य सी थी, मगर थी वह एक नायाब काया की मलिका।

उसके संतरे ‘हाय !’ सोच कर ही लन्ड खड़ा हो जाता है। जब वह चलती तो मानो उसके संतरे ब्लाउज फ़ाड़ के बाहर आने को आतुर दिखाई देते थे।

उसे भी अपनी जवानी पर कुछ ज्यादा ही घमण्ड था। वो अपने चूतड़ बहुत मटका कर चलती थी।

रानू एक स्थानीय कालेज से बी.ई. कर रही थी। जवानी की दहलीज में कदम रख रही थी। फ़िगर कुछ खास नहीं था, पर दिखने में बिल्कुल एक नम्बर की पटाखा थी।

मैं रोजाना अपने काम से लौट कर अपने कमरे में ही रहता हूँ, फ़ेसबुक पर टाईम पास करता हूँ।

वह शुक्रवार का दिन था। मैं अपने काम जल्दी निपटा कर घर आया, कमरे पर जाकर अपना सामान पैक करने लगा।

तभी दरवाजे पर किसी की आहट आई। पलट कर देखा तो वो सुनीता थी। वह उस समय लाल रंग का गाउन पहने हुए थी, “क्या कयामत लग रही थी !”

मेरा तो लण्ड वहीं सामने सैल्यूट करने लगा।

पर फिर थोड़ा सम्भलकर कहा- अरे भाभी आप ! आईए ना, वहाँ दरवाजे पर क्यों खड़ी हैं?

सुनीता- क्या बात है, आज जल्दी आ गए। कुछ काम नहीं था क्या?

मैं- नहीं, नहीं, ऐसी बात नहीं है, घर जाना है बहुत दिन हो गए तो सोचा हो आता हूँ।

भाभी चुटकी लेते हुए- क्या बात है, घर की बड़ी याद आ रही है? कोई खास इन्तजार कर रहा है क्या वहाँ?

मैं हंसते हुए- अरे नहीं भाभी, आप भी कैसी बातें करती हैं, कोई खास होता तो अपने घर से इतनी दूर यहाँ नहीं रहता।

भाभी शरारत भरे स्वर में- ओ हो… तो क्या चौबीस घण्टे घर पर ही रहते, थक नहीं जाते?

मैं चौंकते हुए- क्या भाभी, आप भी ना !

भाभी- हा… हा… अरे भैया, आप तो शर्माने लगे।

मैं बात बदलने के लिए- भाभी आपके यहाँ स्टूल है? मेरा थोड़ा सामान ऊपर रखा है, पर मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है।

भाभी- अरे भैया कुर्सी की जरूरत क्या है? हम हैं ना ! आप हमें उठा लीजिए हम आपके सामान को निकाल देंगे।

साली ऐसी अंगडाई ले कर के बात कर रही थी कि मन तो कर रहा था, छिनाल को यहीं पटक कर चोद दूँ।

मैं- अरे नहीं.. नहीं भाभी, मैं और आपको…??

भाभी- अरे केवल उठाने का ही तो कह रही हूँ, मैं कहाँ तुम्हें मेरा…!!

मैं- मेरा क्या???

भाभी- कुछ नहीं। तुम्हारी इच्छा !

अब बारी मेरी थी, सोचा अबे चूतिये अच्छा खासा मौका है, उठा ले फ़ायदा।

मैंने कहा- ठीक है भाभी।

मैं भाभी को उठाने के लिए उनके पीछे गया और कमर को कस कर पकड़ लिया और उठाने लगा।

भाभी- आ…हा…हा… रुको… रुको, मैं ऐसे में साँस भी नहीं ले पाऊँगी, थोड़ा धीरे से उठाओ।

इधर मेरा लण्ड भी फुफकार मारने लगा। वो उनके चूतड़ों की दरार के बीच घुस रहा था, उन्हें भी वो महसूस हो रहा था।

वो थोड़ी और पीछे होने लगीं, जिससे मेरा लन्ड और भी अन्दर की ओर जाने लगा। मैं तो वहीं खड़ा रह गया।

तभी भाभी बोली- भैया उठाओ भी, या यूँ ही पकड़ कर खड़े रहोगे।

मैं जानबूझ कर शरमाया, सोचा देखता हूँ ये आखिरकार खुद ब खुद मेरी होती है या नहीं।

मैंने भाभी को अबकी बार हल्के हाथ से उठाया, अब उनकी गान्ड मेरे मुँह के पास थी।

“हाय क्या मादक गन्ध थी वह !”

अब सोचा कि इस साली को तो चोद के ही रहूँगा। कुछ गलत हुआ तो क्या होगा ज्यादा से ज्यादा कमरे से ही निकालेगी और क्या करेगी?

मैंने जानबूझ कर अपनी पकड़ ढीली की वो पकड़ से फिसलने लगी। उसका गाउन ऊपर ही रहा पर वो नीचे की ओर फिसलने लगी।

मैंने कहा- अरे भाभी, आप गिर जायेंगी !!

“अरे अरे…अरे…धड़ाम…!”

भाभी और मैं पास ही नीचे जमीन पर बिछे हुए गद्दे पर गिर पड़े। मेरा एक हाथ भाभी के दुद्दुओं के नीचे था।

भाभी औंधे मुँह गिरी थी। गाउन कमर तक चढ़ गया था।

“उफ़ क्या नजारा था ! गोरी चिकनी टाँगें !”

ऊपर से अपने हाथ पर उनके चूचों का दबाव मैं साफ़ महसूस कर सकता था।

मैंने भाभी को आवाज लगाई, “भाभी आप ठीक तो हैं?

भाभी ने जैसे ही देखा कि उनका गाउन कमर तक उठा हुआ है, और उनकी काली पैन्टी साफ़ दिख रही थी। वो शरमा गईं।

मैंने उनके गाउन को उठाया और नीचे करने लगा। नीचे करने के दौरान, मैंने ऊपर से ही भाभी के चूतड़ों पर धीरे से हाथ घुमा दिया।

भाभी के मुँह से ‘आह’ निकल गई। मेरा एक हाथ भाभी के नीचे था, तो एक हाथ से भाभी को सीधा किया।

अब भाभी का मुँह मेरे मुँह के ठीक सामने था। मैंने अब भाभी को हल्के से किस किया, भाभी ने अपनी आँखें बन्द कर लीं।

मैं समझ गया कि भाभी भी अब मूड में हैं। मैंने चुम्बन को चूमाचाटी में बदल दिया।

अब वो भी चुम्बन का जवाब देने लगीं, मैं गाउन के ऊपर से ही उनके कबूतरों को सहलाने लगा।

कभी मेरी जीभ उनके मुँह में तो कभी उनकी जीभ मेरे मुँह में। करीब पाँच मिनट बाद भाभी ने मुझे धक्का दिया।

मैं अचानक लगे इस धक्के से दूर हो गया। मैं सहम गया कि कहीं भाभी डांटने ना लगें।

तभी भाभी बोलीं- दरवाजा खुला है ! तुम नीचे मेरे रूम में आ जाओ।

मैं तो चौंक ही गया।

“एक अन्धा क्या मांगे, दो आँखें !”

मैंने जोर से भाभी को गले लगाया और कहा- थैंक्स भाभी।

भाभी ने गाल पर किस किया और कहा- मैं इन्तजार कर रही हूँ, तुम नीचे आ जाना।

कह कर भाभी नीचे चली गईं। मैंने भी सारा अस्त-व्यस्त सामान ठीक किया और जल्दी से उनके घर जाकर आवाज लगाई।

तभी अन्दर से आवाज आई- आ जाओ भैया। मैं यहाँ अन्दर हूँ।

आवाज अन्दर बेडरूम से आई थी, मैं रुम में गया, देखा भाभी अन्दर उसी गाउन में बैठी थीं।

मैं भी पास जाकर बैठ गया और कहा- भाभी आज जो…!

तभी भाभी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए, मेरी आवाज तो वहीं अटक गई। मैं भी धीरे-धीरे उनके होंठों को चूमने लगा और अपना एक हाथ उनके वक्ष पर रख कर दबाने लगा।

भाभी चुम्बन लेते हुए मादक सीत्कार निकालने लगीं- आह… उफ़्फ़… धीरे थोड़ा आह…

उनका एक हाथ मेरे लन्ड पर था। मैं उस समय जीन्स और टी-शर्ट पहने हुए था।

भाभी बाहर से ही लन्ड सहलाने लगी। मेरा हाथ उनके गाउन के अन्दर सरक रहा था। मैं पैन्टी पर से ही उनकी चूत पर हाथ फिराता रहा, थोड़ा गीला-गीला लगा। मैं समझ गया। भाभी को बड़ी जल्दी है।

इस दौरान चूमा-चाटी ही चल रही थी। अब मैं थोड़ा अलग हुआ, और उनके गाउन को निकाल दिया।

अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में थीं, उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए।

मैंने भाभी को उठाया। और बिस्तर पर लिटा दिया, और जोर-जोर से उनके दूद्दू दबाने लगा।

“हाय क्या लग रहा था!”

उस समय मेरा लन्ड जो कि लगभग 8 का होगा, चूत पर दस्तक दे रहा था। उसकी ब्रा और पैन्टी भी निकाल फेंकी।

अब हम दोनों नंगे थे और शुरू होने वाला था, हवस का नंगा नाच।

मैं 69 की पोजिशन में आ गया। वो मेरे लन्ड को किसी लॉलीपाप की तरह चूस रही थीं।

“आहम्ह… ओह नो…!” मैं चिल्लाया, “सब अभी निकाल दोगी क्या?”

वो बोली- चुप रहो आज जो है, वो सब मेरा है।

मैं भी अब उसकी चूत पर अपनी जीभ घुमाने लगा, अपने एक हाथ की उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।

वह लन्ड को कभी हाथ से हिलाती को कभी पूरा मुँह में ले लेती। इस सबसे मैं बहुत उत्तेजित हो गया।

मैं सिसयाया, “मैं आ रहा हूँ।”

फिर भी उसने मुँह नहीं हटाया और वो अभी भी पूरी स्पीड से मुँह आगे-पीछे कर रही थी।

मैंने अपना सारा वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया।

वह सारा वीर्य बड़े मजे से गटक गई, वो भी अब झड़ने लगी, हम दोनों वहीं लेट गए।

कुछ समय यूँ ही लेटे रहने के बाद जब आँखें खुलीं, तो वो दोबारा मेरे लन्ड को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी।

मैं अब दोबारा दूसरे राउन्ड के लिए तैयार था, मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर पर लिटा दिया।

एक तकिया लिया और उसकी कमर के नीचे लगा दिया। अब उसकी चूत और मेरे लन्ड के बीच केवल थोड़ी ही दूरी थी।

मैंने अपने लन्ड को उसकी चूत की फाँकों पर घुमाने लगा। वो भी आपे से बाहर आने लगी।

“आह… ह्म्म… बस मेरे राज अब और मत तड़पा, अब डाल भी दे।”

पर मैं उसे थोड़ा और तड़पाने लगा, उसकी चूची जोर-जोर से दबाने लगा।

वह जोर से चिल्लाई, “आआ आआआ… ओ माँ… बस बे भेनचोद, अब और कितना इन्तजार करवाएगा।”

गाली सुन कर मैं भी उत्तेजित हो गया।

मैंने कहा- ले साली रान्ड कहीं की, अब तेरी चूत किसी का लन्ड नहीं ले पाएगी।

ये कह कर मैंने अपना लन्ड जोर से उसकी चूत के मुँह पर रखा और कमर उठा कर जोर से धक्का दिया।

अभी आधा लन्ड ही गया था, पर थोड़ा मोटा होने के कारण उसकी चूत की फाँकें खिंचने लगीं। वह जोर से चिल्लाने लगी,
“अह्ह्ह… ओह्हह्ह… सीईईए… मम्मम्म…”

मैंने तुरन्त उसके मुँह पर अपना हाथ रख दिया। उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे। मैं थोड़ा रूका, कुछ देर वेसे ही रहने के बाद जब वो थोड़ा शान्त हुई, मैंने दोबारा जोर से धक्का दिया और पूरा लन्ड चूत की फाँकों को चीरता हुआ अन्दर की ओर घुसता चला गया।

थोड़ी देर तक तो वो दर्द से कराहती रही, फिर कुछ देर बाद उसकी आवाज में मादकता आने लगी। पूरे कमरे मे उसकी सीत्कार की आवाजें आने लगीं, कभी उसकी तो कभी मेरी, और हम दोनों वासना की आँधी में बहने लगे।

एक सैलाब सा आया और जब रुका तो हम दोनों स्खलित होकर एक दूसरे की बाँहों में सिमट कर सुख लेने लगे।

सुनीता भाभी की और मेरी जोड़ी खूब जमी और एक बार की चुदाई रोज का सा नियम बन गया।

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