भाभी को पटाकर गीली चूत चोदी

भाभी को पटाकर गीली चूत चोदी

 

मेरे घर में मैं मम्मी और भाभी ही रहते हैं. मेरे भैया सउदी अरब में रहते है और मुश्किल से 3 साल में एक बार ही घर आ पाते हैं.

पापा भी हफ्ते बाद ही आते हैं.

 

भाई की शादी हुई थी, उसके एक महीने बाद ही वो सउदिया चले गए थे, फिर उनका 2 साल बाद आना हुआ था.

भाभी भी बहुत उदास व परेशान रहती थीं.

 

भाई जब 2 साल बाद आए तो वो ज्यादा दिन नहीं रुक पाए क्योंकि उनको ज्यादा दिन की छुट्टी नहीं मिली थी.

अगले महीने का ही उनका रिटर्निंग टिकट था तो मुश्किल से ही वो एक महीना घर पर रुक पाए थे.

 

भैया वापस चले गए.

उनके जाने के बाद भाभी फिर से उदास रहने लगीं.

 

मैं भी बाहर रह कर पढ़ाई करता था तो भाभी एकदम अकेली पड़ गई थीं.

जब लॉकडाउन लगा तो उसकी वजह से मैं घर आ गया था.

 

एक दिन मैंने देखा कि भाभी छत पर बैठी थीं और भैया से बात कर रही थीं.

फिर मैं आया तो भाभी ने बात खत्म करके कॉल कट कर दिया.

 

वैसे तो मेरे मन में भाभी के लिए कोई ग़लत विचार नहीं था लेकिन भाभी बहुत सेक्सी भी थीं तो कभी कभी बस थोड़ा हंसी मज़ाक कर लेता था.

 

हम दोनों के बीच मजाक की सीमा कुछ बढ़ गई थी तो अब जब भी मुझे उनकी ब्रा की स्ट्रिप दिखती, तो मैं खींच कर छोड़ देता और उन्हें चोट लग जाती.

ये मैंने कई बार कर दिया था.

इससे भाभी को बुरा नहीं लगता था.

 

एक दिन वो रूम में बैठ कर फोन चला रही थीं.

उनकी ब्रा की स्ट्रिप दिख रही थी तो मैंने पीछे से बेड पर बैठ कर स्ट्रिप खींच दी.

 

उस दिन मैं भाभी के रूम में था और भाग नहीं पाया क्योंकि भाभी आगे बैठी थीं.

उन्होंने मुझे पकड़ लिया और मुझे धक्का दे दिया.

 

मैं गिर कर बेड पर लेट गया. मैं उठने की कोशिश करने लगा.

वो मेरे ऊपर चढ़ गईं और मुझसे मज़ाक वाली लड़ाई करने लगीं.

 

मैं उनसे छूटने की कोशिश कर रहा था.

 

भाभी मुझे पकड़ कर मेरे ऊपर चढ़ गई थीं और मेरा एक गाल खींचने लगी थीं.

वो मुझे गुदगुदी करने लगीं.

 

मुझे उनके झुके होने से उनके दूध साफ़ दिखने लगे.

मैंने उनकी कमर ज़ोर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा तो वो मेरे ऊपर कुछ ज्यादा ही झुक गईं और मेरे चेहरे पर उनके दूध दबने लगे.

 

उन्हें भी मज़ा आ रहा था और मुझे भी!

यार पता नहीं उस वक्त मुझे क्या हो गया … मेरा मूड बनने लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया.

 

भाभी को मेरे कड़क लंड का आभास हो गया … वो एक पल को रुकीं पर अगले ही पल वो मुझे फिर से गुदगुदी करने लगीं.

मैंने उन्हें दबोच लिया तो वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगीं.

 

वो कहने लगीं- छोड़ दो प्लीज़!

मैंने नहीं छोड़ा.

 

वो बोलीं- अच्छा सॉरी, चलो अब छोड़ो मुझे जाने दो, काम करना है.

मैंने भाभी को छोड़ दिया और वो चली गईं.

मैं आसपास टहलने निकल गया.

फिर दोपहर को मैं घर आया.

 

मैं अपने रूम में था.

वो आईं.

उन्होंने मॅगी बनाई थी तो वही लेकर आई और पंखे के नीचे बैठ कर हवा लेने लगीं.

भाभी पसीने से भीग गई थीं तो उनकी स्ट्रिप फिर से दिख गई.

मैंने जोर से खींच दी तो स्ट्रिप टूट गई.

वो मेरी तरफ़ देखने लगीं और बोलीं- कर दिया ना नुकसान, अब भरपाई कौन करेगा?

 

मैंने बोला- पैसे ले लेना और नई ले लेना ओके.

वो बोलीं- नहीं रहने दो. बड़े आए पैसे देने वाले.

 

उनकी इस बात से मैंने दूसरी तरफ की स्ट्रिप भी खींच दी.

इस पर भाभी मुझसे फिर से लड़ने लगीं.

 

आज मैंने शॉर्ट्स पहना था. मैंने भागने की कोशिश की मगर वो मेरे ऊपर चढ़ गईं.

शायद उनको मेरे साथ चिपकने में मज़ा आने लगा था.

 

फिर से पहले जैसा ही हुआ.

मैंने ज़ोर से कमर पकड़ ली.

वो मेरे ऊपर आ गईं और उनके दूध मेरे मुँह के पास आ गए थे.

 

उनको मेरी सांसों की गर्मी महसूस हुई तो वो मेरे ऊपर झुक गईं.

उनकी गर्म सांसों से आज मुझे भी अजीब सा लग रहा था.

शायद उन्हें भी मज़ा आ रहा था.

 

कुछ मिनट ऐसे ही ज़ोर ज़बरदस्ती वाली लड़ाई चलती रही और मेरा फिर से मूड बन गया.

 

आज भाभी जी भी शायद पूरे मूड में ही थीं.

उनको महसूस होने लगा कि मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है.

 

वो और भी ज़ोर ज़बरदस्ती करने लगीं जिससे हम दोनों में रगड़न कुछ ज्यादा हो गई.

 

मेरा लंड पूरा तन कर खड़ा हो गया और पूरा साफ़ असर दिखाने लगा.

भाभी थोड़ी ढीली हुईं और मेरे लंड पर थोड़ी सी हिलकर उठने को हुईं.

 

तभी मैंने उन्हें ज़ोर से खींच दिया और वो मेरे ऊपर आ गिरीं.

इस बार उनका मुँह बिल्कुल मेरे मुँह के पास आ गया.

 

मेरे ज़ोर से पकड़ने की वजह से वो मुझसे बिल्कुल से चिपक गई थीं, ऐसा लग रहा था मानो वो किस कर रही हों.

यार मेरा बुरा हाल था.

अभी कुछ खेल हो पाता कि तभी मम्मी उन्हें बुलाने लगीं.

 

फिर भाभी को जाना पड़ा.

लेकिन मुझे आज पूरा यकीन हो गया था कि अब भाभी को भी मज़ा आने लगा है.

 

मेरा लंड खड़ा था तो मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मेरी आज हालत बहुत खराब हो गई थी.

मैं बाथरूम में गया और मुठ मारने लगा.

शाम को मैं चिकन ले आया और मैंने बोला- भाभी, आज आप ही बना दो.

भाभी नॉनवेज नहीं खाती थीं और ना ही बनाती थीं.

 

लेकिन मैंने बोला तो आज भाभी ने बोला- ठीक है, बना तो दूँगी पर मुझे क्या मिलेगा?

मैं इशारा समझने लगा.

 

मैंने भी हंस कर जवाब दे दिया- साफ़ बता दो क्या चाहिए, जो भी चाहिए आपको मिल जाएगा.

भाभी बोली- एक बार सोच लो. जो मांगूंगी, देना पड़ेगा.

 

मैंने कहा- हां ठीक है.

मैं अपने फ्रेंड्स के साथ बाहर चला गया.

फिर शाम को आने में मैं थोड़ा लेट हो गया.

 

सबने खाना खा लिया था.

मैं देर से आया और अपने रूम में गया तो भाभी खाना लेकर आ गईं.

 

मैंने आज थोड़ी पी ली थी, तो मुझे शायद थोड़ा सा नशा हो गया था.

ये भाभी को पता लग गया कि मुझे नशा चढ़ा है.

 

मैंने बोला- भाभी आप खाना रख दो, मैं खा लूँगा.

लेकिन भाभी ने मेरी हालत देख कर कहा- मेरे सामने खाओ, नहीं तो बिना खाए ही सो जाओगे.

 

मैं खाने लगा.

मैंने भाभी से पूछा- आपने खा लिया है?

 

भाभी ने कहा- नहीं.

मैंने कहा- मेरे साथ ही खा लो. जाओ अपने लिए भी खाना ले आओ.

 

भाभी बोलीं- आप खा लो, मैं बाद में खा लूँगी.

मैं उनको अपने हाथ से खिलाने लगा.

 

उन्होंने मना कर दिया.

वो बोलीं- मैं नॉंनवेज नहीं खाती.

 

मैंने ज़बरदस्ती करने लगा और बोला- आप नहीं खाओगी तो मैं भी नहीं खाऊंगा.

थोड़ी देर के बाद उन्होंने अपने हाथ से ही खा लिया.

 

यार मुझे बहुत अजीब लगा कि जो नॉनवेज नहीं खाती हैं, फिर कैसे खा लिया.

कुछ देर बाद उन्होंने मुझे खुद अपने हाथ से खिलाया और खुद भी खाया.

 

खाने के बाद मैं लेटने लगा.

मैंने ड्रेस भी नहीं चेंज की थी.

 

मैं अपनी जीन्स उतारने लगा.

भाभी ने इसमें भी हेल्प की.

 

मुझे शार्ट्स भी पहनाया.

अब मैं लेट गया.

 

तभी भाभी आईं और मुझे अच्छे से सुला कर एक किस किया और जाने लगीं.

मैंने उनको खींच लिया और मैं भी किस करने लगा.

 

भाभी बोलीं- शराब क्यों पी ली?

मैंने कहा- यार, दोस्तों ने पिला दी.

 

वो कुछ नहीं बोलीं.

मैंने भाभी को खींच लिया.

 

आज हमारे बीच कुछ ज्यादा ही होने लगा.

मैं भाभी को ज़ोर से हग करके किस करने लगा.

भाभी भी कुछ नहीं बोल रही थीं.

 

अब मुझे पूरा भरोसा हो गया था कि भाभी मुझे बिल्कुल भी मना नहीं करेंगी.

 

मैंने भाभी कि गर्दन पर किस स्टार्ट कर दिया.

भाभी भी मज़े लेने लगीं.

 

तभी मैंने उनके मम्मों को दबाना चाहा पर भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

 

उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ा और कहा- ये क्या कर रहे हो?

मैंने अपने हाथ को रोका नहीं और उनके मम्मों की तरफ बढ़ाने लगा.

 

उन्होंने मुझसे ऐसे बोला जरूर था मगर उनका मुझे मना करने का मन नहीं दिख रहा था.

मैंने कहा- भाभी, प्लीज़ आज थोड़ी हेल्प कर दो. प्लीज़ भाभी, मुझे मत रोको.

 

वो बोलीं- ठीक है पर ज्यादा कुछ नहीं ओके?

मैंने ओके कहा और उनके ब्लाउज में हाथ डाल दिया.

 

मुझे जन्नत का सुख मिलने लगा. भाभी के नर्म दूध मुझे लज्जत देने लगे.

मैं उनके दूध जोर से दबाने लगा.

 

भाभी भी मादक भाव से मेरी तरफ देखने लगीं और उनकी आंखों में वासना साफ़ झलकने लगी.

मैंने उन्हें चूम लिया. भाभी ने भी मेरे चुम्बन में साथ दिया.

 

थोड़ी देर मैं भाभी को ऐसे ही किस करता रहा और उनके दूध दबाता रहा.

फिर भाभी बोलीं- ब्लाउज उतार दो.

 

मैंने पीछे से हुक खोल दिया.

भाभी ब्रा में हो गईं.

 

भाभी बोलीं- रूको, पहले दरवाजा बंद करके आ जाओ.

मैंने बोला- क्यों कौन आ जाएगा? … मम्मी तो सो गई हैं, बाद में बंद कर देना.

ये कह कर मैंने भाभी की ब्रा खोल दी और उनके एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया.

मैं भाभी के दूध चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा.

 

भाभी भी फुल मूड में आ गई थीं.

 

मैंने कहा- भाभी आज फुल मस्ती हो जाए.

उन्होंने कुछ नहीं बोला.

 

मैं समझ गया कि भाभी की तरफ से हां है.

मैं अपना हाथ नीचे लगाया और चूत टटोल कर कहा- यार भाभी आपको तो गीली हो रही है.

 

वो कुछ नहीं बोलीं.

मैंने भाभी के कान में धीरे से कहा- यार, पहले ही बता देतीं.

अब भाभी बोलीं- दो दिन से तुमने गीला कर दिया था रगड़ कर, आज भी कर दिया. अब इतने नासमझ भी न बनो.

मैंने कहा- तो फिर ठीक है, आज बोला है आपने तो गीला ही नहीं, कुछ और भी होगा.

 

भाभी मेरा साथ देने लगीं.

उनका हाथ मैंने अपनी अंडरवियर में डाल दिया और कहा- लो पकड़ो इसे!

 

उन्होंने लंड पकड़ लिया ओर अंडरवियर से बाहर निकाल लिया.

मेरा लंड पूरा खड़ा था.

 

भाभी बोलीं- थोड़ी शर्म करो, ठीक है मैंने बोला है मगर इतनी बेशर्मी ठीक नहीं है.

मैंने कहा- अब शर्म की बात मत करो.

 

भाभी- क्यों?

मैंने कहा- जिसने की शर्म उसके फूटे कर्म.

भाभी हंस दीं.

 

मैं भाभी का पेटीकोट खोलने लगा और साड़ी हटा कर पेटीकोट भी हटा दिया.

अब भाभी पैंटी में थीं.

 

यार रेड कलर की पैंटी में क्या कमाल लग रही थीं.

 

मैंने कहा- अब रूको, दरवाजा और खिड़की बंद कर आओ, फिर करना.

भाभी धीरे से इधर उधर देख कर अपने रूम में गईं और नाइटी पहन कर सब दरवाजे बंद करके आईं और कमरे का गेट लॉक करके आ गईं.

 

आज बस नशे का बहाना था. नशा तो थोड़ा ही था पर मैंने भाभी को ज्यादा दिखाने का नाटक किया था.

 

भाभी आईं और मेरे सामने नाइटी उतार दी.

मैंने उनको अपनी बांहों में खींचा और उन्हें चूमने लगा, फिर से उनके निप्पलों से खेलने लगा, एक को मुँह में ले लिया और दूसरे को उंगलियों में दबा कर मींजने लगा.

भाभी की आंह आह निकलने लगी.

 

मैंने उनकी पैंटी भी उतरवा दी.

अब वो बिल्कुल नंगी थीं और मैं गंजी अंडरवियर में था.

 

उन्होंने मेरे कपड़े उतार दिए और मुझे किस करने लगीं.

हम दोनों को मज़ा आने लगा.

 

कुछ देर बाद मैंने कहा- भाभी, मेरा थोड़ा सा मुँह में ले लो.

वो मना करने लगीं और कहने लगीं- मुँह में अच्छा नहीं लगता मुझे!

 

मैंने थोड़ी देर मनाया तो मान गईं और घुटनों के बल बैठ कर मेरा लंड मुँह में ले लिया.

यार बहुत मज़ा आया मुझे … वो बहुत तेजी से लंड चूसने लगीं.

 

ऐसा लग ही नहीं रहा था कि भाभी को लंड चूसने में मजा नहीं आता.

उनके लंड चूसने से तो ऐसा लग रहा था कि ये तो शादी के पहले से ही लंड चूसने की कला में निपुण थीं.

 

मैं 69 में आ गया और उनकी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया.

वो भी गीली होने लगी थीं, कहने लगीं- अब देर न करो.

 

मैंने कहा- पहले मुझे भी कुछ कर लेने दो भाभी.

अपना मुँह मैंने उनकी चूत पर रख दिया और एकदम से चूत रगड़ दी.

 

वो पूरी तरह से मचल गईं.

मैं भाभी की चूत चूसने लगा.

 

उनकी चूत का टेस्ट बहुत गजब का था. नमकीन अमृत जैसा स्वाद मिल रहा था.

मैंने कहा- अब पेल दूँ क्या?

 

भाभी बोलीं- क्यों निमंत्रण देना होगा क्या?

मैंने चुदाई की पोजीशन बनाई और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा.

 

वो तड़प गईं और बोलीं- अब डाल भी दो.

मैंने एक ही झटके में पूरा लंड चूत में घुसा दिया.

 

वो तड़प गईं और बोलीं- आराम से करो.

पर मैं उन्हें धकापेल चोदने लगा.

 

वो भी मज़े लेने लगी और बोलने लगीं- यार, कितने दिन से आपको पटा रही थी.

मैंने कहा- पहले ही बोल देतीं.

वो हंसने लगीं.

 

मैंने कहा- जब नॉनवेज खाती नहीं थीं, तो क्यों खाया.

भाभी बोलीं- पहले खाती थी मगर बाद में छोड़ दिया था. अब आपके प्यार में खाना पड़ा. मैंने नॉनवेज न खाने की कसम खाई थी.

मैंने कहा- मुझसे सच्चा प्यार करती हो?

भाभी बोलीं- तभी तो चिकन खाकर अपनी कसम तोड़ दी.

 

अब मैं उन्हें मस्ती से चोद रहा था.

थोड़ी देर के बाद उनका रस निकल गया और वो निढाल हो गईं.

 

मेरा अभी नहीं हुआ था, मैं भाभी को चोदता ही गया.

वो फिर से चार्ज हो गईं और मज़े लेने लगीं.

 

वो बोलीं- आज पूरा रस निकाल दो.

मैं और तेज गति से चोदने लगा और अब चरम पर आ गया था.

मेरा भी काम होने वाला था.

 

मैंने बोला- भाभी, मेरा होने वाला है.

वो बोलीं- तेज़ तेज़ करो.

 

मैंने तेज़ करने के साथ ही पूछा- कहां लोगी?

पोर्न भाभी सेक्स के नशे में बोलीं- अन्दर ही करो, बहुत दिन से सूखी पड़ी है … आज इसको गीली कर दो.

 

मैंने फुल स्पीड में किया और मेरा निकल गया. मेरे साथ ही उनका भी एक बार फिर से निकल गया.

थोड़ी देर मैं उनके ऊपर ही पड़ा रहा.

 

जब हटा, तो वो खड़ी हुईं.

उनकी चूत से रस निकल कर बाहर आ रहा था.

मुझे बहुत अच्छा लगा.

 

मैंने भाभी से कहा- टपक रहा है … साफ़ कर लो और फिर से आ जाओ अभी मन नहीं भरा.

भाभी बोलीं- अभी फिर से करना है क्या?

 

मैंने कहा- हां.

भाभी बोलीं- कहीं भागी नहीं जा रही हूँ. कल कर लेना.

 

मैंने कहा- आओ पहले आज मन भरके कर लेने दो. कल का कल देखा जाएगा.

वो बाथरूम से आईं और हम दोनों थोड़ी देर किस करते रहे.

 

मैं उनके मम्मों को चूसता रहा, वो अपने हाथ से पकड़ कर अपने चुचे चुसवाती रहीं.

 

थोड़ी देर में मेरा फिर से खड़ा हो गया.

मैंने कहा- भाभी, फिर से तैयार हो गया.

 

भाभी बोलीं- तो आ जाओ.

मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया.

 

इस बार बहुत देर तक चुदाई चली.

भाभी भी पूरी खुश हो गई थीं.

 

इस बार भी मैं रस अन्दर ही छोड़ दिया था.

 

भाभी पूरी रात मेरे रूम में ही नंगी सोईं.

सुबह जल्दी उठ कर चली गईं और जाते जाते मुझे अंडरवियर भी पहना दिया था.

 

अगले दिन मैंने पोर्न भाभी की गांड भी मारी.

उस दिन भाभी को ज्यादा दर्द हुआ.

 

अब लगभग एक साल से ज्यादा हो गया.

मेरा जब मन होता मैं पोर्न भाभी से सेक्स का मजा लेता हूँ.

कभी कभी तो हम दोनों किचन में ही खाना बनाते बनाते सेक्स कर लेते हैं.

 

वो दवा ले लेती हैं तो बच्चे होने की कोई टेन्शन नहीं रहती.

अब तो इंजेक्शन आ गया है, एक बार लगवाओ और तीन महीने तक खुल कर चुदाई का मजा लो.

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